विराम चिन्ह: परिभाषा, प्रकार, उदाहरण और उनका प्रयोग

विराम चिन्ह की परिभाषा :-विराम का अर्थ है “रुकना या ठहरना”। लिखते या बोलते समय वाक्यों के बीच में अर्थ की स्पष्टता, भावों को दर्शाने और सार्थक बनाने के लिए कुछ समय का ठहराव लिया जाता है, जिसे विराम चिन्ह (Punctuation Marks) कहते हैं

विराम चिन्ह के प्रकार

विराम चिन्ह के 13 प्रकार होते हैं:–

1. पूर्ण विराम
2. अर्द्ध विराम
3. अल्प विराम
4.  उप विराम
5. प्रश्नवाचक चिन्ह
6. योजक चिन्ह
7. कोष्ठक चिन्ह
8. अवतरण या उदहारणचिन्ह
9. विस्मयादिबोदक चिह्न
10.लाघव चिन्ह/ संक्षेपसूचक
11.निर्देशक चिह्न
12.विवरण चिन्ह
13. विस्मरण चिन्ह या त्रुटिपूरक चिन्ह/हंसपद

पूर्ण विराम (।)

जब भी हम बात करते हैं, तब वाक्य के खत्म होते समय हम ठहराव लाते हैं। इसी प्रकार लिखते समय भी वाक्य पूरा होने के बाद पूर्ण विराम लगाया है। विस्मायवाचक वाक्यों और प्रश्नवाचक वाक्यों को छोड़ कर हर वाक्य के अंत में विराम चिन्ह का उपयोग किया जाता है। विराम चिन्ह के उदाहरण कुछ इस प्रकार हैं :-

जैसे-  सीता बाज़ार गई थी। बाज़ार से उसने फल खरीदें। 

दोहा, शायरी या छंद  में भी पूर्ण  विराम का प्रयोग होता है | जहां पहले चरण के खत्म होने के बाद एक पूर्ण लगता है, वहीं दूसरा चरण ख़त्म होने पर दो पूर्ण  विराम लगाए जाते हैं

अर्द्ध विराम (;)

एक ऐसा विराम चिन्ह है जो पूर्ण विराम (।) से छोटा और अल्पविराम (,) से थोड़ा बड़ा ठहराव देता है। आसान भाषा में समझा जाए तो यह तब प्रयोग में आता है जब दो वाक्य अलग भी हों और जुड़े हुए भी हों। जैसे:-

बच्चों ने खूब पढ़ाई की; फिर भी उनके नंबर कम आए।
मैंने दरवाज़ा भी खटखटाया; फिर भी अंदर से कोई आवाज़ नहीं आई।
मौसम बहुत प्यारा था; इसलिए हमने पार्क जाने का फैसला किया।

अल्प विराम (,)

अल्प विराम का अर्थ है छोटा सा ठहराव। इसका उपयोग हम किसी वाक्य में चीज़ों को अलग-अलग दिखाने के लिए करते हैं। इसका ज्यादातर उपयोग छोटे वाक्यों को जोड़ने, वस्तुओं की सूची लिखते समय करते हैं। जैसे:-

सीता, गीता पढ़ रही थीं।
दिल्ली, मुंबई और कोलकाता बड़े शहर हैं।
अगर तुम चाहो, तो हम चलते हैं।

उप विराम (:)
इसे अपूर्ण विराम भी कहते हैं। जब किसी चीज़  को अलग से दर्शाया जाता है। जैसे- राम: खाना खाता है।

माँ : ममता की मूरत होती है।
कुसुम: चलिए , आपको मामा से मिलवाऊं।
अमित : भाई, अभी मैं उनसे बात नहीं करना चाहता।

प्रश्नवाचक चिन्ह (?)

प्रश्नवाचक चिन्ह विराम चिह्न का उपयोग प्रश्न पूछने वाले वाक्यों के अंत में किया जाता है। इसका उपयोग उन वाक्यों के अंत में होता है जहां हम कुछ पूछते हैं, जानकारी चाहते हैं या संदेह व्यक्त करते हैं।

वाक्य में प्रश्नवाचक शब्दों जैसे; कब, कहाँ , कैसे , क्यों, कौन आदि के साथ लगाया जाता है। जैसे –
1. आप क्या कर रही हैं?
2. आपको यहां किसने बुलाया ?
किसी बात की पुष्टि करने के लिए भी इसका उपयोग होता है। जैसे;
1. यहां आओगे न?
2. कभी आगरा गए हो?

योजक चिन्ह (–)

योजक चिन्ह को अंग्रेज़ी में डैश कहते हैं। य विराम चिन्ह का ही एक स्वरूप है जिसका उपयोग दो शब्दों को जोड़ने के लिए किया जाता है। इसमें किसी भी प्रकार को कोई ठहराव नहीं होता। उदाहरण के लिए निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यानपूर्वक पढ़ें –

तत्पुरुष और द्वंद समास दोनों पदों के बीच में :  पति- पत्नी, रोटी-कपड़ा , अच्छा-बुरा
मध्य  के अर्थ में : कालका-हावड़ा-मेल ।
तुलना सूचक सा/सी/से के पहले : चांद-सा सुन्दर, लक्ष्मण-सा भाई।
विभिन्न शब्द (युग्मों में)- धूम-धाम, खट–पट ।

कोष्ठक चिन्ह ()

इस चिन्ह का उपयोग तब होता है जब वाक्य में अतिरिक्त जानकारी, स्पष्टीकरण, वर्ष, अर्थ या उदाहरण जोड़ने की कोशिश की जाए।  जैसे :-
1. कृपया अपना पहचान पत्र (आधार कार्ड/पैन कार्ड) साथ लाएँ।
2. राम ने बनारस (वाराणसी) की यात्रा की

अवतरण या उदाहरण चिन्ह ( “…” )

इस का उपयोग तब किया जाता है जब जब किसी का सीधा कथन, संवाद, उद्धरण, कविता की पंक्ति, या किसी विशेष शब्द या वाक्य को ठीक उसी रूप में लिखना हो।

उदाहरण:
1. महात्मा गांधी ने कहा था, “अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है।”

2. “सत्यमेव जयते” भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य है।

विस्मयादिबोधक चिह्न [ ! ]

जब किसी वाक्य में आश्चर्य, खुशी, दुख, क्रोध, आदेश, चेतावनी, दुख, भय या किसी भी तीव्र भाव का बोध कराया जाए तब  विस्मयादिबोधक चिह्न का प्रयोग होता है अर्थात विस्मयादिबोधक चिन्ह (!) का प्रयोग अव्यय शब्दों से पहले होता है।

जैसे – वाह! तुमने बहुत अच्छा काम किया।
सावधान! आगे खतरा  है।
उफ़! कितनी गर्मी है।

लाघव चिन्ह/ संक्षेपसूचक (०)

लाघव चिन्ह (०) का उपयोग शब्द, नाम, पद, संस्था या पदवी को छोटे रूप में लिखने के लिए किया जाता है।

संख्या  के लिए – सं०
डॉक्टर  के लिए – डा०
मध्यप्रदेश के लिए ― म० प्र०

निर्देशक चिह्न [ — ]

निर्देशक चिह्न यह एक बड़ी लकीर की तरह होता है जिसके आकार योजक चिन्ह से बड़ा होता है। यह वाक्य में एक लंबा विराम देता है, जिससे पाठक का ध्यान उस हिस्से पर विशेष रूप से जाता है। उदाहरण:-

मेहनत, अनुशासन, ईमानदारी—इनसे ही लक्ष्य पूरे होते हैं।
जीवन में सफलता उन्हीं को मिलती है—जो हार नहीं मानते।

विवरण चिन्ह ( :- )

विवरण चिन्ह का प्रयोग वाक्यांश के विषयों में कुछ सूचक निर्देश आदि देने के लिए किया जाता है। इसके उदाहरण इस प्रकार है :-

निष्कर्ष:- मेहनत ही सफलता की चाबी है।

मेरे पास ये किताबें हैं:- हिंदी, गणित, विज्ञान।

विस्मरण चिन्ह/हंसपद चिन्ह (^)

इसे त्रुटिपूरक भी कहते  हैं | लिखते समय जब कोई शब्द छूट जाता है तब इस चिन्ह को लगाकर उस शब्द को ऊपर लिख दिया जाता है। इस विराम चिन्ह के उदाहरण इस प्रकार है :-

1. मैं^ स्कूल गया। — मैं आज स्कूल गया।।
2. मीना^ लायी — मीना खीर लाई।